मैंने कुछ ९-१० महीने पहले बंगलोर में ही एक ही टेलीफोन एक्सचेंज के अंतर्गत ही, अपना घर बदला। टेलीफोन स्थानांतरण के लिए जुलाई महीने के आख़िर में ऍप्लिकेशन दी। शिफ्ट होते होते अप्रैल हो गया। कोई बात नही, कुछ नयी लाईन बिछानी थी इसलिए ८ महीना लग गया। शुरू के तीन महीने मैंने बिल भी पे किया पर जब शिफ्टिंग का कोई सीन नही दिख रहा था तो मैंने लेखा अधिकारी से बात करी और पेमेंट करना बंद कर दिया। आखिर फ़ोन इस्तेमाल में तो था नही। १ अप्रैल को फ़ोन लगा है और ७ या ८ अप्रैल को नॉन-पेमेंट के चलते फ़ोन कट गया। मैंने सोचा सरकारी ऑफिस है, कोई ताज्जुब नही! फिर मैं उनके लेखा अधिकारी ऑफिस गया, १५ मिनट के अन्दर उन्होंने समस्या का निवारण कर दिया। मैं बड़ा खुश, चलो अन्दर से कोई कोऑर्डिनेशन नही है पर कम से कम जब ग्राहक मिलने आता है तो समस्या को तुरंत समझ कर निवारण तो करते हैं। अपने बी एस एन एल वाराणसी के १० साल पहले के अनुभव से ये तो कई गुना अच्छा है।
कल शाम को उन्होंने फिर से मेरा फ़ोन काट दिया - नॉन-पेमेंट के चलते। ८ महीने फ़ोन काम नही कर रहा था, उसमें से मैंने ३ महीनें बिल का भुगतान भी किया। इस हिसाब से बी एस एन एल को तो मुझे पैसा देना बनता है। उल्टे वो मेरा ही फ़ोन काट दे रहे हैं। वो भी दो बार मैं जब ख़ुद जा कर के उनसे मिल चुका हूँ तब। आज फिर मैं उनसे मिल कर आया, इतना प्यार है मुझे अपने सरकारी फ़ोन से। फिर उन्होंने फटाफट मेरा काम कर दिया, पुराने बिल कैन्सल वगैरह वगैरह। देखता हूँ, अगले महीनें क्या होता है!

एक और छोटी सी कथा है irctc को लेके। फिर कभी...

2 comments:
सरकारी या गैर सरकारी-उपभोक्ताओं को परेशान करने में कोई कसर नहीं बचती जब शामत आ जाये तब ही. लिखिये irctc पर भी-कम से कम ज्ञात तो रहे.
अच्छा प्रयास है इन्हें प्रकाश में लाने का.
बीएसएनएल का नाम ही मत लीजिए,
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