5.13.2008

चित्र पहेली -बूझिये तो जानें !


चित्र पहेली -ध्यान से देखिये ऑर बताईये यह है क्या ..मुझे तो लगता नही कि कोई बता पाएगा मगर अगर किसी ने बता दिया तो मान जाऊंगा कि इस दुनिया मे सचमुच एक से बढ़कर एक हैं -जो सचमुच हैं भी .....
तो फिर जनाब बूझिये इस चित्र पहेली को .......
उत्तर की प्रतीक्षा कीजिये ......

12 सुधी पाठकों की राय:

ई-गुरू माया said...

वास्तव में बड़ी ही सुंदर तकिया है, पर भाईजान ये सोफे वाली तकिया है. आप चाहे तो इसे कुशन भी ख सकते हैं.

Anonymous said...

Fruit- Cantaloup

arvind mishra said...

शुक्रिया मगर यह कोई तकिया वकिया थोड़े ही है -फिर ट्राई करिये ...

arvind mishra said...

Thanks dear,but it is not cantaloupe either !

Anonymous said...

यह आक का फल है जिसमें बीज रोएँ के साथ भरे रहते हैं। गर्मियों में फट जाते हैं और लूँ में उड़ते रहते हैं। यह गुझिया जैसे होते हैं।

मीनाक्षी said...

किसी सब्ज़ी या फल को चाकू की धार से तराशा गया है...शायद खीरा या कद्दू.. जो भी है आपके हाथ में है और वस्तु पूरी तरह से स्पष्ट नहीं दिख रही.

Udan Tashtari said...

आक है-Calotropis gigantea

arvind mishra said...

meenaakshi
नही यह खीरा या कद्दू भी नहीं मीनाक्षी जी !
Anonymous
"यह आक का फल है जिसमें बीज रोएँ के साथ भरे रहते हैं। गर्मियों में फट जाते हैं और लूँ में उड़ते रहते हैं। यह गुझिया जैसे होते हैं।"
आक बोले तो ...क्या मदार ???

Udan Tashtari said...

जी हाँ, आक याने मदार!

arvind mishra said...

Anonymous
"यह आक का फल है जिसमें बीज रोएँ के साथ भरे रहते हैं। गर्मियों में फट जाते हैं और लूँ में उड़ते रहते हैं। यह गुझिया जैसे होते हैं।"
Udan Tashtari
"आक है-Calotropis gigantea"
आख़िर बूझ ही ली गयी पहेली !
मान गए उस्ताद -अनाम भाई को और उड़न तस्तरी -क्या समीर लाल जी ?
इनकी एक्स रे नजरों से यह रहस्य छुपा नही रह सका ...मुझे बहुत खुशी है -यह तो फल का आंतरिक गूदा है ,मगर पहचानने वालों की नजर भी क़यामत की है -मैं बचपन मी इनसे खेला करता था --ये विषैले होते हैं और शिव को चढाये जाते हैं .मुझे ये शाल्कों वाली मछली जैसे लगते थे -
आप सभी का आभार .

mahashakti said...

पहेली बूझ ली गई :(

मेरे लिये तो कुछ बचा ही नही

महामंत्री (तस्लीम ) said...

बहुत सुन्दर पहेली थी। और ईमानदारी से कहूं तो मेरे वश के बाहर थी। खैर सुधी जनों ने इसे हल ही कर लिया।
चलिए इसी बहाने अरविंद जी को भी पता चल गया कि दुनिया में हैं और भी सुखनवर बहुत सारे...