आज भी जब मुझे नींद आती नहीं,
गिन के तारे जब कटती हैं रातें मेरी।
दर्द मेरा जब कोई समझता नहीं,
याद आती है माँ बस तेरी-बस तेरी।
प्रदीप वसुदेव पांडेय -94506-27543
अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हल्का हो जाएगा...
आज भी जब मुझे नींद आती नहीं,
गिन के तारे जब कटती हैं रातें मेरी।
दर्द मेरा जब कोई समझता नहीं,
याद आती है माँ बस तेरी-बस तेरी।
प्रदीप वसुदेव पांडेय -94506-27543
Labels: चिठ्ठी आई है -आज भी, प्रदीप, मदर्स डे
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4 comments:
मम्मी........
माँ तुझे सलाम.
prakashji bahut khub par dukh yah hai ki aaj sab mother's day to bade dhoom-dhaam se manaate hai par kewal day hi manate hai .
ha, kamla ji aap sahi sochti hain.
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